March 27, 2026
Yusuf Pathan’s Zero Hour mention on improving the working conditions of doctors, nurses and other health care workers

सर, डदल की लंग्वेज सेगजराती म ु ंभी बोल सकता हू।ं मंइस सदन का ध्यान स्वास्थ्यकडमायं डवशेष रूप सेिॉक्टरं और नसं की गभीर ं कमी तथा इसके कारण उन पर पड़ रहेकाम के बोझ और तनाव की ओर आकडषात करना चोाहता हू। डचोडकत्सा स ँ ेजड़ुेलोग लंबेसमय तक बहुत तनावपूणामाहौल मंकाम करतेहंऔर कई बार उन्हंपयााप्त आराम भी नहं डमल पाता। िॉक्टरं और नसं की भारी कमी के कारण यह समस्या और भी बढ़ गई हैऔर इसका बोझ मौजूदा कमाचोाररयं पर पड़ रहा है। भारत मं प्रडत 1000 लोगं पर केवल 3.06 िॉक्टर, नसाऔर दाइयाँउपललध हं, जो डवश्व स्वास्थ्य सगठन द्वारा तय डकए गए 4.45 क ं े मानक सेकम है। साल 2023 तक प्राथडमक स्वास्थ्य कंद्रं मंिॉक्टरं और मेडिकल ऑडफसरं के स्वीकृत पदं मंसे22 परसंट पद खाली हं। सामदाडयक स्वास्थ्य क ु ंद्रं मंडवशेषज्ञ िॉक्टरं के 68 परसंट पद खाली हं। कंद्र सरकार द्वारा सचोाडलत अस्पतालं म ं ंभी लगभग हर दस मंसे तीन िॉक्टर और डवशेषज्ञं के पद खाली पड़ेहं। कमाचोाररयं की यह कमी केवल मरीजं को डमलनेवाली सेवाओंकी गणविा को ही प्रभाडवत नहं करती, बडल्क िॉक्टरं और नसं क ु े स्वास्थ्य पर भी बरा असर िालती ह ु ै। िॉक्टरं पर डकए गए सवेमंपाया गया हैडक 74 प्रडतशत िॉक्टर रोज़ाना या हर सप्ताह भावनात्मक रूप सेथकान महसूस करतेहं। िॉक्टर और नसाहमारेस्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ हं। इसडलए मंसरकार सेआग्रह करता हूँडक वह तरुतं कदम उठाकर स्वास्थ्यकडमायं के डलए अडधक मानवीय और सहयोगपूणा काया-पयाावरण तैयार कर।