Latest News

November 24, 2016

Fifteen things Trinamool have said on #DeMonetisation

Fifteen things Trinamool have said on #DeMonetisation

1. Different people have reacted differently from the time this announcement was made. Some people have conducted polls on their mobile app, some people have shed crocodile tears while millions have suffered.

2. Mamata Banerjee was the first person to raise her voice against this draconian demonetisation, and reacted to the decision – not ten days or fifteen days later, but within two hours. “While we are strongly against black money, corruption, we are deeply concerned about common people, small traders, how will they buy essentials tomorrow? This is financial chaos, disaster let loose on the common people of India. He (Prime Minister) could not get back the promised black money from abroad, hence so much drama.”

3. More of what the Trinamool Congress Chief said soon after the announcement: “We want to know from the Prime Minister how our poorest brothers and sisters, who’ve received their week’s hard-earned wage in one Rs 500 note will buy atta, chawal tomorrow. This is a heartless and ill-conceived blow to the common people, the middle class, the agricultural cooperatives, the tea garden workers, the unorganised labour sector, shopkeepers, farmers, small businessmen. All will suffer, there will be starvation deaths.”

4. Trinamool means grassroots. This is the voice of the people. More than 70 people have died. Lives have been ruined irrespective of caste, community and creed. This is not merely an inconvenience, it is killing the economy.

5. In a year, the three months from December to February are the most productive time for construction and development projects. Everything is shut, progress is halted. The tea garden and jute mill workers are not receiving their salary and are in distress. The transport sector has been hit.

6. The Centre has given exemption from demonetisation to all its sectors – railways, transport, petroleum –  but state-controlled agricultural cooperatives have not been permitted to exchange currency. This is not federalism, States have shut down.

7. Sixteen Opposition parties have united against the Government. This is a chorus of the people.

8. Trinamool Congress raised the issue of black money in Parliament in 1998. Trinamool MPs had a demonstration on black money both inside and outside Parliament in 2014. What is the Government doing about electoral reforms? Mamata Banerjee  has been raising the issue of electoral reforms for two decades. 80% of donations received by parties are from “unknown sources”.

9. Demonetisation is a big black scandal. People are suffering. This is a grim situation. We have offered concrete suggestions. One of the suggestions offered is to allow old and new 500 rupee notes to function parallel to each other. If you had to keep demonetisation a secret, what prevented you from printing more Rs 100 notes and other smaller denominations?

10. Four out of five villages in India don’t have a bank. We all want to get to a cashless society. But 95% debit cards in India are not used to buy anything, they are used only to withdraw cash. One Minister may want to buy his vegetables and do his laundry with plastic, everybody cannot.

11. GDP per day is Rs 45,000 crore. Of this, 59% is private consumption on household financial expenditure (which is about Rs 27,000 crore). 87% of this is cash. That’s about Rs 24,000 crore. So if it is Rs 24,000 crore cash, and it has been 15 days, my submission is, you can challenge my figure, we have lost Rs 3.75 lakh crore GDP in the last 15 days. Only 0.02% of currency is counterfeit. So what do you do to the other 99.98%? You penalize the whole country.

12. During Singur andolan we were alone. But Mamata Banerjee fought and it was people’s victory. Even Supreme Court, a decade later, confirmed our convictions.  You cannot suppress the voice of the people.

13. Anyone who opposes the Government policy is not supporting black money, is corrupt or anti-national. The PM thinks he alone is the messiah and all of us are devils. We strongly oppose the Government because poor are suffering and economy is being killed.

14. Try as you may, through your agencies, to hassle and harass us, it will embolden our conviction to fight. You may even try to jail Mamata Banerjee, but that will only make our movement stronger because we are fighting for the people. This is is not a political movement. This is a people’s movement.

15. The party’s position on ‘Joint Parliamentary Committee’ (JPC) is clear. Seven JPCs have been formed till date, without any results. They are a waste of time.



१। जिस समय से यह घोषणा की गयी है उस समय से लोगों ने अलग अलग ढंग से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जहाँ कुछ लोगों ने अपने मोबाइल एप्लीकेशन पर चुनाव संचालित किया और कुछ लोगों ने मगरमच्छ के आँसू बहाए वहीँ लाखों ने कष्ट उठाया।

२। ममता बैनर्जी पहली व्यक्ति थी जिन्होंने इस कठोर फैसले का विरोध किया। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाने का निर्णय १५ दिन के बाद नहीं बल्कि दो घंटे से कम में लिया। हम काले धन और ब्रष्टाचार के विरुद्ध हैं लेकिन हमें आम आदमी की चिंता है। यह आम आदमी कल सामान कैसे खरीदेगा । यह एक वित्तीय अराजकता है जो पूरे देश पर छा गयी है। प्रधान मंत्री इसलिए इतना नाटक कर रहे हैं क्योंकि वो विदेश से काला धन वापस नहीं ला पाए ।

३। तृणमूल सभानेत्री ने घोषणा के बाद यह भी कहा – “हम जानना चाहते हैं कि हमारे गरीब भाई-बहन, जिन्हें हफ्ते की कड़ी मेहनत के बाद वेतन मिला है, वह कल चावल और आटा कैसे खरीदेंगे? यह आम लोगों, मध्यम वर्ग, कृषि सहकारी समितियों, चाय बागान श्रमिकों, असंगठित श्रम क्षेत्र, दुकानदारों, किसानों, छोटे व्यापारियों के लिए एक बुरा झटका है।वे सब भुगतेंगे और भूख से मर जायेंगे”

४। तृणमूल का मतलब है ‘जनसाधारण’। 70 से अधिक लोग मारे गए हैं। कई लोग तबाह हो गए हैं। यह केवल एक असुविधा नहीं है बल्कि हमारीअर्थव्यवस्था को नष्ट कर दे रही है।

५। साल के तीन महीने – दिसंबर से फरवरी -निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए सबसे उत्पादक समय है।सब कुछ बंद है, प्रगति को रोक दिया गया है। चाय बागान और जूट मिल के मजदूरों को वेतन नहीं मिला है, वो संकट में हैं।परिवहन क्षेत्र में बहुत परेशानी हो रही है।

६। रेलवे, परिवहन, पेट्रोलियम – केंद्र ने विमुद्रीकरण से अपने सभी क्षेत्रों को छूट दी है, लेकिन सरकार नियंत्रित कृषि सहकारी समितियों को मुद्रा का आदान-प्रदान करने की अनुमति नहीं दी है। यह संघवाद नहीं है, राज्य बंद हो रहे है।

७। सोलह विपक्षी दलें सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट हुई हैं। यह पूरे देश की आवाज़ है।

८। 1998 में, तृणमूल कांग्रेस ने संसद में काले धन का मुद्दा उठाया था। 2014 में तृणमूल सांसदों ने काले धन के मुद्दे पर संसद के अंदर औरबहार एक प्रदर्शन किया था। सरकार निर्वाचन संबंधी सुधारों के बारे में क्या कर रही है? ममता बैनर्जी निर्वाचन संबंधी सुधार के मुद्दे को दो दशकोंसे उठा रही हैं। पार्टियों द्वारा प्राप्त 80 प्रतिशत चंदा कहाँ से आता है किसी को पता नहीं है।

९। विमुद्रीकरण एक बड़ा काला scandal है। लोगों को तकलीफ़ हो रही है। स्थिति बहुत ही गंभीर है। हमने ठोस सुझाव दिया है। एक सुझाव है किनए और पुराने 500 रुपये के नोटों को एक साथ चलने दिया जाये। अगर आपको विमुद्रीकरण को गुप्त रखना ही था तो आपको सौ रुपये और उससेकम मूल्य वाले नोटों को ज़्यादा संख्या में छपवाने से किसने रोका था?

१०। भारत के ५ में से ४ गांवों में बैंक नहीं है। हम सब चाहते हैं कि कैशलेस इकॉनमी बने, लेकिन ९५% डेबिट कार्ड आज भी सिर्फ पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल होता है नाकि खरीदारी के लिए। कोई एक मंत्री अपने कार्ड से खरीदारी कर ही सकता है, लेकिन सब के लिए यह संभव नहीं है।

११। भारत का एक दिन का जीडीपी है ४५००० करोड़ रुपए। इस में से ५९% निजी उपभोग और घर के खर्चे है (इसकी कुल कीमत होगी २७००० करोड़रूपए), इसका ८७% नगद होता है, जो लगभग २४००० करोड़ रूपए है। इस हिसाब से
१५ दिनों में देश के जीडीपी को ३.७५ लाख करोड़ रूपए का भारत का एक दिन का जीडीपी ४५००० करोड़ रूपया है। इस में से ५९% निजी उपभोग और घर के खर्चे है (इसकी कुल कीमत होगी २७००० करोड़ रुपये), इसका ८७% नगद होता है, जो लगभग २४००० करोड़ रूपया है। इस हिसाब से १५ दिनों में देश के जीडीपी को ३.७५ लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। और देश में जितना मुद्रा प्रचलित हैं, उसका ०.०२% नक़ली है। तो फिर बाकि ९९.९८% को क्यों तकलीफ पहुँचा रहे हैं?

१२। सिंगुर आंदोलन के वक़्त हम अकेले थे। पर ममता बनर्जी डट कर जमी रहीं और लोगों की जीत हुई। दस साल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हमारे विश्वास की पुष्टि की। आप लोगों की आवाज़ को नहीं दबा सकते हैं।

१३। एक आदमी जो सरकार की नीति का विरोध करता है काले धन का समर्थक नहीं है और ना ही वह बेईमान या राष्ट्रविरोधी है। प्रधान मंत्री सोचते हैं कि वह अकेले ही मसीहा हैं और हम सब शैतान। हम दृढ़ता से सरकार का विरोध करते हैं क्योंकि गरीब तकलीफ मैं हैं और अर्थव्यवस्था की हत्या कर दी जा रही है।

१४। आप अपनी एजेंसियों के माध्यम से हमें जितना भी डराने की कोशिश करें, हमारे दृढ विश्वास को तोड़ नहीं पाएँगे। आप अगर ममता बैनर्जी को जेल में भी डाल दे, तो भी जनता का यह संग्राम नहीं रुकेगा। यह राजनैतिक लड़ाई नहीं है, लोगों के हक़ की लड़ाई है।

१५। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को लेकर हमारी पार्टी के विचार स्पष्ट हैं। आज तक ७ जेपीसी बनी हैं लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला। जेपीसी सिर्फ वक़्त की बर्बादी है।


নোট বাতিলের প্রতিবাদে তৃণমূলের প্রতিক্রিয়া

১। বিমুদ্রিকরণের আনুষ্ঠানিক ঘোষণা হওয়ার পর থেকে বিভিন্ন মহল থেকে নানারকম মতামত এসেছে। কেউ নিজেদের মোবাইল জনমত সমীক্ষা করেছেন, আবার কেউ এই ইস্যুতে কুম্ভীরাশ্রুর বন্যা বইয়ে দিয়েছেন।

২। নোট বাতিলের এই হঠকারী সিদ্ধান্ত ঘোষণার দুঘন্টার মধ্যেই এই হঠকারী সিদ্ধান্তের বিরুদ্ধে মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় প্রথম আওয়াজ তোলেন। তিনি বলেন, “আমরা কালো টাকার বিরুদ্ধে, কিন্তু সাধারণ মানুষ, ছোট ব্যবসায়ীদের ব্যাপারেও চিন্তিত। কাল মানুষ নিত্যপ্রয়োজনীয় জিনিষপত্র কিনবে কি করে? এটা অর্থনৈতিক অরাজকতা। বিদেশ থেকে কালো টাকা ফেরত আনতে না পেরে এখন প্রধানমন্ত্রী প্রহসন করছেন।”

৩। ঘোষণার পর তৃণমূলনেত্রী আরও বলেন: “আমাদের দরিদ্র, খেটে খাওয়া ভাই ও বোনেরা, যারা ৫০০ টাকার নোটে মাইনে পান, তারা কাল বাজারহাট কিভাবে করবেন? এই নিষ্ঠুর সিদ্ধান্তের কারণে সাধারণ মানুষ, মধ্যবিত্ত, কৃষি-সমবায়, চা বাগান কর্মী, জুট মিল কর্মী, অসংগঠিত শ্রমিক, দোকানের মালিক, ছোট ব্যবসায়ীরা ক্ষতিগ্রস্ত হবেন। অনাহারে মৃত্যু হবে।

৪। তৃণমূল মানে সাধারণ মানুষের কণ্ঠস্বর। ৭০ জনেরও বেশি মানুষ প্রাণ হারিয়েছেন। জাতি, ধর্ম, বর্ণ নির্বিশেষে মানুষের জীবন জর্জরিত। এটা শুধুমাত্র সাময়িক অসুবিধা নয়, অর্থনীতিকে শেষ করে দিচ্ছে এই সিদ্ধান্ত।

৫। সারা বছরের মধ্যে এই তিন মাস (ডিসেম্বর – ফেব্রুয়ারী) সব থেকে উত্পাদন ভালো হয় সে নির্মাণ কাজ হোক বা উন্নয়নমূলক কাজ। কোনো কাজ হচ্ছে না, সব বন্ধ হয়ে গেছে। চা বাগান কর্মী, জুট মিল কর্মীরা বেতন পাচ্ছেন না, তারা খুবই কষ্টে আছেন।

৬। রেল, পরিবহণ, পেট্রোলিয়াম সব ক্ষেত্রে ছাড় দিয়েছে কেন্দ্র। কিন্তু রাজ্যের কৃষি সমবায়কে কোন ছাড় দেওয়া হয়নি। এটা যুক্তরাষ্ট্রীয় পরিকাঠামোর পরিপন্থী। রাজ্যগুলি ভুক্তভোগি।

৭। নোট বাতিল ইস্যুতে ১৬টি বিরোধী দল সরকারের ঐক্যবদ্ধ হয়েছে। এটা জনগণের সমবেত প্রতিবাদের ভাষা।

৮। ১৯৯৮ সালে সংসদে তৃণমূল কংগ্রেস কালো টাকার বিষয়টি উত্থাপন করেছিল। ২০১৪ সালে আবারও সংসদের উভয়কক্ষে কালোটাকার বিষয়টি উত্থাপন করেছিলেন তৃণমূল সাংসদরা। নির্বাচনী সংস্কার নিয়ে কি সিদ্ধান্ত নিয়েছে সরকার? মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় দুই দশক ধরে এই নির্বাচনী সংস্কারের বিষয়টি উত্থাপন করে আসছেন। দলগুলি দ্বারা গৃহীত অনুদানের ৮০ শতাংশ টাকার উৎস ‘অজানা’।

৯। বিমুদ্রিকরন এখন এখন একটি (বিগ ব্ল্যাক স্ক্যান্ডাল) বড় কেলেঙ্কারি। এর ফলে দেশে জরুরী অবস্থা তৈরি হয়েছে। এই সিদ্ধান্ত চরম আঘাত হিসেবে নেমে এসেছে সাধারণ মানুষের ওপর। আমাদের কিছু কংক্রিট পরামর্শ আছে। প্রথমত, পুরনো ও নতুন ৫০০ টাকার নোট সমানভাবে চালু রাখা উচিত। আপনাদের যদি এই নোট বাতিলের সিদ্ধান্ত গোপন রাখার ছিল তাহলে সরকার কেন প্রচুর পরিমাণে ১০০ টাকার নোট ছাপায়নি?

১০। ভারতবর্ষের পাঁচটি গ্রামের মধ্যে চারটিতে ব্যাঙ্ক নেই। আমরা সকলে cashless সমাজ চাই। কিন্তু ভারতে ৯৫ শতাংশ ডেবিট কার্ড কিছু কিনতে ব্যবহার করা হয় না, শুধুমাত্র টাকা তুলতে ব্যবহার করা হয়। একজন মন্ত্রী চাইলে কার্ড ব্যবহার করে তাঁর প্রয়োজনীয় জিনিস (যেমন- সবজি, ফল) কিনতে পারেন কিন্তু সকলের পক্ষে তা সম্ভব নয়।

১১। দেশের দৈনিক জিডিপি ৪৫০০০ কোটি টাকা। এর মধ্যে ৫৯% গৃহস্থের ব্যক্তিগত খরচের খাতায় যায়, যা সংখ্যায় দাঁড়ায় ২৭০০০ কোটি টাকায়। এর ৮৭% নগদ, যা দাঁড়ায় ২৪০০০ কোটি টাকায়। তাহলে এই দাঁড়ায় যে ১৫দিনে দেশের জিডিপির ৩.৭৫ লক্ষ কোটি টাকা ক্ষতি হল। নগদ টাকার ০.০২% জাল। তাহলে দেশের বাকি ৯৯.৯৮% লোকে কেন শাস্তি পাবে ?

১২। সিঙ্গুরের আন্দোলন আমরা একা লড়েছি। কিন্তু সাধারণ মানুষের জন্য মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় লড়াই করে গেছেন এবং মানুষের জয় হয়েছে। একমাস আগে আমাদের সেই লড়াইকে স্বীকৃতি দিয়েছে সুপ্রিম কোর্ট। এটাও মানুষের লড়াই। আপনি জনগণের মুখ বন্ধ করতে পারবেন না।

১৩। যিনি প্রধানমন্ত্রীর নীতির বিরোধিতা করবে, তিনিই কালো টাকার সমর্থক বা দেশদ্রোহী নন। প্রধানমন্ত্রী মনে করেন ‘তিনি একাই মসিহা আর আমরা সবাই খারাপ লোক?’ আমরা সরকারের এই সিদ্ধান্তের বিরোধিতা করছি কারণ সাধারণ মানুষ চূড়ান্ত ভোগান্তির শিকার হচ্ছেন।

১৪। যতইচ্ছে চেষ্টা করুন, যত খুশি এজেন্সিগুলি দিয়ে হয়রান করুন আমরা পিছু হঠব না। এমনকি আপনারা চাইলে মমতা দি কে জেলেও পাঠাতে পারেন কিন্তু তাতে আমাদের প্রতিবাদ থেমে যাবে না। কারণ আমরা সাধারণ মানুষের জন্য লড়াই করি। এটা কোন রাজনৈতিক লড়াই নয়, এটা মানুষের লড়াই।

১৫। যৌথ সংসদীয় কমিটি নিয়ে দলের অবস্থান স্পষ্ট। এখনও পর্যন্ত ৭টা কমিটি গঠন করা হয়েছে, কোন লাভ হয়নি। শুধু সময় নষ্ট হয়েছে।